Prem Kiya Hai? Kisi Ko Pana Ya Khud Ko खो देना?

Prem क्या है? किसी को पाना या khud को खो देना?

एक बंधन या फिर मुक्ति? Jivan या फिर Jahar? इसके बारे में सबकी Apni अपनी राय हो सकती हैं |, Lekin वास्तव में प्रेम क्या है आइए Jante हैं। 

Saru Karne Se Pahele Ek Shayri Hai Aapke Liye

"हमने Prem किया उसने GAME किया...
इसलिए हमने Decide किया है, इसके आगे से
Prem भी हम ही करेंगे
और GAME भी हम ही करेंगे..."


मूल रूप से Prem का मतलब है कि Koi और आपसे कहीं ज्यादा (100%) महत्वपूर्ण हो चुका है। यह दुखदायी भी हो सकता है, क्योंकि इससे Aapke अस्तित्व को खतरा है। जैसे ही आप kisi से कहते हैं, मैं तुमसे Prem करता हूं, आप अपनी पूरी आजादी खो देते है। Aapke पास जो भी है, आप उसे खो देते हैं। Jivan में आप जो भी करना चाहते हैं, वह Nahi कर सकते। Bahut सारी अड़चनें हैं, Lekin साथ ही यह Aapko अपने अंदर खींचता chala जाता है। यह एक slow जहर है, बेहद मीठा जहर। यह खुद को Mita देने वाली स्थिति है। Agar आप khud को Nahi मिटाते, तो आप kabhi prem को जान ही नहीं पाएंगे। 


love is blind
love is blind
Aapke अंदर का koi न koi हिस्सा मरना ही चाहिए। Aapke अंदर का वह हिस्सा, Jo अभी तक Aap था, Use मिटना Hoga, Jisse कि Koi और चीज  या Insaan उसकी Jagah ले सके। अगर आप ऐसा नहीं होने देते, तो यह Prem नहीं है, बस Hisab-Kitab है, लेन-देन है।

Jivan में Hamne Kai Tarah के संबंध Bana रखे हैं

Jivan में Hamne Kai Tarah के संबंध Bana रखे हैं, Jaise पारिवारिक संबंध, वैवाहिक संबंध, व्यापारिक संबंध, सामाजिक संबंध आदि। Ye संबंध Hamare Jivan ki bahut sari जरूरतों को pura karte हैं। ऐसा nahi है कि इन संबंधों में prem जताया nahi जाता या होता ही नहीं।बिलकुल hota है। prem तो Aapke हर kam में झलकना चाहिए। आप हर kam प्रेमपूर्वक कर sakte हैं। lekin Jab Prem की baat ham Ek आध्यात्मिक प्रक्रिया के रूप में karte हैं, तो इसे khud को Mita देन की प्रक्रिया की तरह Dekhte हैं। जब Ham मिटा Dene की बात कहते हैं तो हो सकता है, यह Negative लगे। Jab आप वाकई किसी से Prem करते हैं तो आप अपना व्यक्तित्व,  अपनी पसंद-नापसंद, Apna सब kuch समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं। जब Prem नहीं होता, तो लोग कठोर हो जाते हैं। जैसे ही वे kisi से prem करने लगते हैं, तो वे हर जरूरत के अनुसार  खुद को ढालने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह Apne Aap में एक शानदार आध्यात्मिक प्रक्रिया है, क्योंकि इस tarah Aap लचीले हो जाते हैं। Prem बेशक khud को मिटाने wala है और यही इसका sabse खूबसूरत pahelu bhi  है। 

Prem और आस्था दोनो पर ही किसी का जोर नही ...ये मन जहाँ लग जाए ...वही पर रब नजर आता है .

प्रेम के बारे में बहुत जानकारी आपने हासिल की है आपके कुछ प्रेम से कोई बात share करना चाहते  है| यह कमेंट जरुर कीजिये | आभार

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